भारत में प्रदुषण से हर 6 मिनट में 1 मौत

भारत में प्रदुषण से हर 6 मिनट में 1 मौत

​The Jagran News Special: गाड़ियों का जहरीला धुआं ले रहा है जान, भारत में हर 6 मिनट में 1 मौत!

​नई दिल्ली। सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां सिर्फ हमारा सफर तय नहीं कर रहीं, बल्कि एक साइलेंट किलर बन चुकी हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं की वजह से भारत में हर 6 मिनट में एक इंसान की समय से पहले मौत हो रही है। इससे भी ज्यादा दुखद ये है कि हर साल 15 हजार से ज्यादा मासूम बच्चे इसी प्रदूषण के कारण अस्थमा का शिकार हो रहे हैं।

​आंकड़े जो सच में डराते हैं

​वाहन प्रदूषण से होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

​ट्रांसपोर्ट से होने वाली मौतों में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 13% हो चुकी है।

​सड़क परिवहन प्रदूषण के कारण देश में हर साल 90 हजार जानें जा रही हैं।

​NCR की सांसों में सबसे ज्यादा जहर

आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली-NCR के हालात सबसे ज्यादा भयावह हैं। पूरे देश की सिर्फ 5% आबादी NCR में रहती है, लेकिन वाहन प्रदूषण से होने वाली बीमारियों और मौतों के 23% मामले सिर्फ यहीं से आ रहे हैं।

​क्या है इसका असली समाधान?

हालात मुश्किल जरूर हैं, लेकिन इसका सबसे असरदार और जमीनी समाधान हमारी अपनी प्रकृति के पास ही है:

​बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना: हमें खाली जगहों, सड़कों के किनारे और अपनी कॉलोनियों में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की मुहिम छेड़नी होगी। नीम, पीपल और बरगद जैसे पेड़ प्राकृतिक 'एयर प्यूरीफायर' का काम करते हैं और हवा में मौजूद जहरीले कणों को सोख लेते हैं।

​घरों में तुलसी और पौधे लगाना: बाहर के प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ घर की हवा को शुद्ध रखना भी जरूरी है। हर घर की बालकनी या आंगन में तुलसी का पौधा जरूर होना चाहिए। तुलसी हवा को साफ करने में बेहद कारगर है। इसके अलावा एलोवेरा और स्नेक प्लांट जैसे इनडोर प्लांट्स लगाकर हम अपने परिवार को जहरीली हवा से काफी हद तक बचा सकते हैं।

​वक्त आ गया है कि हम मशीनों के साथ-साथ वापस हरियाली की तरफ मुड़ें, ताकि आने वाली पीढ़ियां खुलकर सांस ले सकें।